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हरियाणा में डाक कर्मचारियों की व्यापक हड़ताल । निजीकरण का कर रहे है विरोध ।

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CITY MEDIA (Ambala): अंबाला छावनी में आज डाक कर्मचारियों की व्यापक हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला पोस्ट ऑफिस पूरी तरह से बंद रहे । जिसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा । पोस्ट ऑफिस के कर्मचारियों ने सुबह जीपीओ अंबाला पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की ।

हड़ताल के चलते (General Post Office) GP अंबाला कैंट समेत अन्य डाक घरों पर ताला लटका रहा । कर्मचारियों की हड़ताल के चलते आज राखियां नहीं गई कार्यालय में डाक का ढेर लगा हुआ है । उधर डाक कार्यालय में जमा कराने पहुंचे ग्राहकों और पार्सल भेजने पहुंचे लोगों की भारी परेशानी झेलनी पड़ी डाक विभाग के कर्मचारी ने अपनी 20 सूत्रीय मांगों के समर्थन में मोर्चा खोला है । उसी कड़ी में आज देश भर में डाक जारी अपने अपने कार्यालय में धरना देकर रोष प्रकट करेंगे कर्मचारियों ने मांगे पूरी ना होने पर बड़ा आंदोलन करने की भी चेतावनी दी है ।

कर्मचारी पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने के साथ-साथ निजीकरण का विरोध कर रहे हैं । हड़ताल कथित तौर पर डाक कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संघों के बीच विफल वार्ता का परिणाम है – जो पोस्टल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (पीजेसीए) के बैनर तले एक साथ आए हैं । केंद्र सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग (डीओपी) के साथ ‘निगमीकरण’ पुनर्गठन योजना के संबंध में है । अगर सरकार का यही रवैया रहेगा तो आंदोलन करने को करने से नहीं झुकेंगे ।

नेशनल फेडरेशन ऑफ पोस्टल एम्पलाइज हरियाणा सर्कल के सचिव नरेश गुप्ता ने बताया

नरेश गुप्ता ने कहा कि विभाग और सरकार की सभी छोटी बचत योजनाओं को इंडियन पोस्ट ऑफिस पेमेंट बैंक लिमिटेड को सोपने जा रही है । 1 अक्टूबर 2018 को स्थापित हुए बैंक (IPPB) का घाटा बढ़कर 31 मार्च 2021 की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 821 करोड़ रुपए हो गया है ।

डाकघर बचत बैंक (पीओएसबी), जिसके माध्यम से डाक विभाग अपने बैंकिंग और बीमा कार्यों का संचालन करता है, के पास लगभग 30 करोड़ खाते है और 10 लाख करोड़ रुपये बकाया राशि है । ये कार्य विभाग के कुल राजस्व का लगभग आधा है और इस प्रकार, इस कार्य को आईपीपीबी के साथ विलय करने से डाक विभाग के वित्त को भारी झटका लगेगा । वर्तमान में छोटी बचत योजनाओं के माध्यम से जनता का 10 हजार करोड़ इन स्कीमों में जमा है लेकिन सरकार जनता के साथ धोखा कर रही है ।

मजूमदार ने अखबार को बताया कि डाक कर्मचारियों की आशंका तब सच हुई जब सरकार ने सुझाव दिया कि विभाग के पास केवल मुख्य डाक कर्तव्य ही रहने चाहिए और बैंकिंग और बीमा कार्यों को आईपीपीबी में मिला दिया जाना चाहिए।

नेशनल फेडरेशन ऑफ पोस्टल एम्प्लॉइज (NFPE) ने दावा किया है कि देश में डाक विभाग के 4.5 लाख कर्मचारियों में से अधिकांश (60%) बुधवार, 10 अगस्त को हड़ताल पर हैं, जो कि संघ द्वारा किए जा रहे प्रयासों के विरोध में है। सरकार विभाग के कुछ वर्गों का निजीकरण और निगमीकरण करेगी।

डाक वितरण के अपने मुख्य कार्य के अलावा, भारतीय डाक ने बीच के वर्षों में डाकघर लघु बचत योजना के तहत जमा स्वीकार करने, जीवन बीमा कवर प्रदान करने और यहां तक ​​कि श्रमिकों को मजदूरी के वितरण के एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए और अधिक जिम्मेदारियां निभाईं । महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) भी इनमे से एक है ।

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