कल्याण चौबे
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पूर्व फुटबालर कल्याण चौबे बने अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ के अध्यक्ष | Kalyan Chaubey becomes the new AIFF President

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कल्याण चौबे ने बाइचुंग भूटिया को 32 वोटों से हरा कर अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ के अध्यक्ष बने ।

अंबाला (एसपीभाटिया/ सुनील मान) अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ के चुनावो में आज कल्याण चौबे 33 मतों से विजयी हुए हैं। उनका सीधा मुकाबला बाईचुंग भूटिया के साथ था, जिन्हें एक 1 वोट हासिल हुआ है। हरियाणा फुटबाल एसोसिएशन के महासचिव एवं एआईएफएफ के सदस्य एडवोकेट ललित चौधरी ने सिटी मीडिया को बताया कि एआईएफएफ के अध्यक्ष पद की दौड़ में भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक 45 साल के बाईचंग भूटिया का सीधा मुकाबला मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के पूर्व गोलकीपर कल्याण चौबे से था।

हरियाणा प्रदेश से एआईएफएफ के एक मात्रा सदस्य एडवोकेट ललित चौधरी हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज के काफी करीबी हैं। चौबे को गुजरात और अरुणाचल प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों से समर्थन मिलने के कारण अध्यक्ष पद की दौड़ में जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।

चौबे पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के नेता भी हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्हें पर्याप्त राजनीतिक समर्थन भी मिला है। जो इस खेल के खेल संस्थानों के चुनाव में काफी महत्वपूर्ण होता है। चर्चा है कि चौबे को पूर्वोत्तर के

प्रभावशाली राजनेताओं में से एक का समर्थन हासिल है जिसकी भारतीय खेलों में सक्रिय रुचि है। भारतीय फुटबाल से जुड़े कई लोगों का मानना है कि यही कारण है कि भूटिया के घरेलू राज्य संघ सिक्किम ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन नहीं किया है। दो अन्य शीर्ष पदों उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के लिए भी दो उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला है।

राजस्थान फुटबाल संघ के अध्यक्ष और कांग्रेस के नेता मानवेंद सिंह और एनए हारिस उपाध्यक्ष पद के लिए मुकाबला था। हारिस कनाटक फुटबाल संघ के अध्यक्ष और राज्य में कांग्रेस के विधायक हैं। एनए हारिस उपाध्यक्ष चुने गये है। उन्हें 34 में से 29 वोट मिले। कोषाध्यक्ष पद के लिए आंध्र प्रदेश राज्य संघ के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण कोसाराज और अरुणाचल प्रदेश के किपा अजय दो उम्मीदवार मैदान में थे। किपा अजय कोषाध्यक्ष चुने गये। उन्हें 32 वोट प्राप्त हुए। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के तौर पर भूटिया का नाम प्रस्तावित करने वाले कोसाराजू ने 26 अगस्त को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए एक पत्रा लिखा था। सूत्रों ने हालांकि कहा कि उन्होंने नाम वापस लेने के लिए कोई फार्म नहीं भरा था। इन चुनावो में 14 एक्जीक्यूटिव मेंबर भी चुने गये हैं।

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