अंबाला (सिटी मीडिया) केंद्र के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की तर्ज पर हरियाणा के लिए नयी विधानसभा बनाने का प्रस्ताव है। विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व सीएम हरियाणा को पत्र लिखा है। नये परिसीमन को ध्यान में रखते हुए स्पीकर ने यह कार्रवाई शुरू की है। उन्होंने चंडीगढ़ में ही जगह की मांग की है ताकि राजधानी चंडीगढ़ पर हरियाणा का दावा पहले की तरह बरकरार रहे। माना जा रहा है कि नये परिसीमन में हरियाणा में लोकसभा व विधानसभा की सीटों में इजाफा हो सकता है। जिसके बाद हरियाणा में लोकसभा की 14 सीटें व विधानसभा की 126 सीटें होगीं जिन पर विधायक चुनाव लड़ेगें।

परिसीमन से इन हलकों पर पड़ा था असर परिसीमन में भिवानी जिला का मुंढाल हलका खत्म हो गया। इसके गांवों को बवानीखेड़ा व दादरी में मिला दिया। वहीं दादरी के कुछ गांव बाढ़डा में शामिल हो गए थे। रोहतक जिले में हसनगढ़ सीट खत्म हो गई और इसे किलोई में शामिल करके गढ़ी-सांपला-किलोई हलका अस्तित्व में आया। यहां से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा विधायक हैं। झज्जर की साल्हावास सीट खत्म हो गई और कोसली नया हलका बना। जाटूसाना को भी खत्म करके इसके कुछ गांव कोसली में मिलाए गए। फरीदाबाद में मेवला-महाराजपुर की जगह तिगांव सीट बन गई। एनआईअी और बड़खल भी नये हलके बने। सोनीपत की रोहट सीट और पानीपत की नोल्था खत्म हो गई। नोल्था की जगह पानीपत ग्रामीण हलका बन गया। सिरसा की रोड़ी सीट खत्म हो गई और इसी जगह रानियां अस्तित्व में आई। आदमपुर को तोड़कर नलवा नया हलका बना। अम्बाला जिले में नग्गल को खत्म करके अम्बाला सिटी नई सीट बनाई। कैथल में जुंडला व राजौंद को खत्म किया गया। गुरुग्राम में बादशाहपुर नई सीट बनी और तावड़ू की जगह सोहना हलका बन गया। घिराव हलके को खत्म करके इसके गांव नलवा व बरवाला में शामिल हुए। सिरसा में दड़बा कलां को खत्म किया गया। इसी तरह से भट्टू कलां हलका भी खत्म हुआ। यमुनानगर के छछरौली की जगह जगाधरी हलका बना। पंचकूला जिला में पहले कालका अकेला हलका था। अब पंचकूला भी अलग सीट है। इसी तरह से कुछ आरक्षित सीट ओपन हो गई और कुछ हलकों को रिजर्व किया गया।


हर बीस साल बाद होने वाले परिसीमन की तैयारियां आने वाले समय में शुरू हो जाएंगी। 2024-25 में नया परिसीमन आने की उम्मीद है। बेशक, यह लागू 2029 के लोकसभा व विधानसभा चुनाव में ही होगा। प्रदेश में बढ़ी हुई आबादी के हिसाब से इस बार परिसीमन में लोकसभा व विधानसभा की सीटों के बढ़ने की उम्मीद है।

वर्तमान में हरियाणा में लोकसभा की 10 और विधानसभा की 90 सीट हैं। वहीं प्रदेश से राज्यसभा के पांच सांसद बनते हैं। नये परिसीमन में लोकसभा की सीट बढ़कर 14 होने की उम्मीद है। इस हिसाब से विधानसभा हलकों की संख्या भी 125 से अधिक हो जाएगी। राज्यसभा सदस्यों की संख्या भी इसी अनुपात में बढ़ेगी। पंजाब व हरियाणा की विधानसभा एक ही छत के नीचे हैं। हरियाणा विधानसभा के हाउस में आज के दिन 90 से अधिक सदस्यों के बैठने की न तो व्यवस्था है और न ही इतनी जगह कि इसमें सिटिंग क्षमता को बढ़ाया जा सके। यही स्थिति पंजाब की भी है। ऐसे में दोनों राज्यों को परिसीमन के बाद नई विधानसभा की जरूरत पड़ने वाली है।

नब्बे में से 17 सीटें हैं रिजर्व-नब्बे सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा की 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इनमें मुलाना, सढ़ौरा, शाहाबाद, गुहला, नीलोखड़ी, इसराना, खरखौदा, नरवाना, रतिया, कालांवाली, उकलाना, बवानीखेड़ा, कलानौर, झज्जर, बावल, पटौदी व होडल शामिल हैं। इसी तरह से लोकसभा की दस सीटों में से अम्बाला व सिरसा अजा के लिए आरक्षित हैं।

अगर लोकसभा व विधानसभा की सीटें बढ़ती हैं तो रिजर्व हलके भी बढ़ेंगे। 2008 में हुआ था सीटों में बड़ा फेरबदल- 2004-05 में चौटाला सरकार के कार्यकाल के दौरान परिसीमन का काम शुरू हो गया था। हालांकि परिसीमन की फाइनल रिपोर्ट का नोटिफिकेशन 2008 में आया था। 2009 के लोकसभा चुनावों में नये परिसीमन के हिसाब से चुनाव हुए थे।

हालांकि लोकसभा की सीटों की संख्या 10 और विधानसभा की नब्बे ही रही, लेकिन कई विस सीटें खत्म हो गई थी। इनकी जगह नये हलके अस्तित्व में आए थे। इसी तरह से भिवानी-महेंद्रगढ़ को मिलाकर एक संसदीय सीट बनाई गई। गुरुग्राम फिर नई लोकसभा सीट बन गई थी।

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