नई दिल्ली. कोरोना महामारी (Covid-19) के साथ इससे जुड़ी हुई भ्रामक खबरें भी समाज में खूब फैली हैं. अब केंद्र सरकार की तरफ से इसका जवाब दिया गया है. नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल (Dr. VK Paul) ने बच्चों में कोरोना से जुड़े कई भ्रम पर तथ्यात्मक जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि बच्चों के इलाज को लेकर पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था की गई है. साथ ही उन्होंने साफ किया कि सामान्य तौर पर बच्चों में कोरोना लक्षणविहीन होता है और बेहद कम अवसर पर अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है.वहीं एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने जानकारी दी है कि देश-दुनिया में ऐसा कोई डेटा नहीं मौजूद है जो कहता हो कि आगामी लहरों में बच्चों पर गंभीर प्रभाव होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि दूसरी लहर के दौरान बच्चे कोरोना संक्रमण के बाद सामान्य बीमारी के बाद ठीक हो गए. जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, उन्हें या तो पहले कोई बीमारी रही होगी या फिर इम्युनिटी लेवल कम होगा.

बच्चों में शुरू हो चुका है कोवैक्सीन का ट्रायल, सितंबर-अक्टूबर में आ सकते हैं नतीजे

कोविड वर्किंग ग्रुप के चेयरपर्सन डॉ. एनके चोपड़ा ने कहा कि बीते 25 जून से बच्चों में कोवैक्सीन (COVAXIN) के ट्रायल की शुरुआत की जा चुकी है. ये ट्रायल 2 से 18 वर्ष के बच्चों में किए जा रहे हैं. इसके नतीजे सितंबर-अक्टूबर तक आ सकते हैं. उन्होंने भी कहा कि बच्चों में संक्रमण तो हो सकता है लेकिन ये सामान्य तौर पर गंभीर नहीं होता.

कोरोना उपयुक्त व्यवहार अपनाना सबसे ज्यादा जरूरी

बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय और देश के बड़े एक्सपर्ट्स की तरफ से कहा जा चुका है कि कोरोना की आगामी लहरों के लिए भी कोरोना उपयुक्त व्यवहार अपनाना होगा. मास्क, हाथ धुलना और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियम अब भी कारगर हैं. देश में डेल्टा+ वैरिएंट के बढ़ते मामलों के बीच तीसरी लहर की आशंका भी जताई जाने लगी है. हालांकि जून महीने में देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार में अच्छी-खासी तेजी देखी गई है. केंद्र सरकार की तरफ से कहा जा चुका है कि दिसंबर महीने तक देश की पूरी आबादी का वैक्सीनेशन कर दिया जाएगा.

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