दिसंबर, 2020 में नगर परिषद रेवाड़ी और 3 नगर पालिकाओं – सांपला, धारूहेड़ा और उकलाना के आम चुनावो के साथ इनके प्रधान पद का प्रत्यक्ष चुनाव भी करवाया गया जिनमें रेवाड़ी के प्रधान का पद पिछड़े वर्ग महिला हेतु, सांपला नगर पालिका का अनुसूचित जाति महिला के लिए जबकि उकलाना और धारूहेड़ा नगर पालिकाओं के पद अनारक्षित थे. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावो बाद निर्वाचित प्रधानों की गजट नोटिफिकेशन में उकलाना नगर पालिका से सुशील कुमार और धारूहेड़ा नगर पालिका से कँवर सिंह का नाम नोटिफाई किया गया हालांकि दोनों को सामान्य वर्ग की बजाये अनारक्षित दशार्या गया।

24 जून, वीरवार 2021
चंडीगढ़ (सिटी मीडिया) हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा प्रदेश की 45 नगर निकायों (नगर परिषदो और नगर पालिकाओं ) जहाँ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जल्द ही अगले आम चुनाव करवाए जाने हैं, उन सभी के कुल अध्यक्ष / प्रधान पदों में से कौन कौन से निकाय आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगे, इसके निर्धारण हेतु ड्रा से चयन किया गया है. हरियाणा म्युनिसिपल अधिनियम, 1973 में वर्ष 2019 के कानूनी संशोधन द्वारा नगर परिषद/पालिका के प्रधान पद का चुनाव स्थानीय मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष तौर पर करने का प्रावधान किया गया।
बहरहाल, 45 नगर निकायों के प्रधानों में से 9 निकायों में प्रधान का पद अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए एवं उन 9 में से 3 निकायों में प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला उम्मीदवारों हेतु आरक्षित होंगे. इसके अलावा 4 नगर निकाय में प्रधान पद पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के लिए जबकि उन 4 में से 2 निकाय में प्रधान पद पिछड़े वर्ग की महिलाओ हेतु आरक्षित होंगे. इसी प्रकार सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए 10 नगर निकाय में प्रधान पद आरक्षित होंगे जबकि शेष 23 नगर निकाय में प्रधान सामान्य वर्ग से होंगे. हालांकि इन सबकी आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होनी बाकी है।
इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि सामान्य वर्ग की महिला के लिए एवं सामान्य वर्ग हेतु पद/सीट के लिए उपयुक्त शब्द है क्रमश: अनारक्षित (महिला ) एवं अनारक्षित. उन्होंने बताया कि कोई कोई भी पद या सीट जब ओपन या अनारक्षित घोषित होती है तो इसका यह अर्थ यह नहीं है कि उस पर केवल और केवल सामान्य अर्थात जनरल कैटेगरी का उपयुक्त व्यक्ति (महिला या पुरुष ) ही चुनाव लड़ सकता है बल्कि यह पद/सीट सभी वर्गों के लिए ओपन होती है एवं इस पर किसी भी जाति/वर्ग का उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है. इसलिए जनरल वर्ग के लिए आरक्षित की बजाये इनके लिए अनारक्षित का उल्लेख होना चाहिए।

हेमंत ने बताया कि तीनो प्रकार के नगर निकायों में अर्थात नगर निगम, नगर परिषद या नगर पालिका के प्रधान पदों के आरक्षण हेतु मुख्य तौर पर भारत के संविधान का अनुच्छेद 243 टी लागू होता है जिनके खंड 4 के अनुसार हर राज्य विधानमंडल /विधानसभा ऐसे पदों पर अनुसूचित जाति (एस.सी.), अनुसूचित जनजाति (एस.टी.) और महिलाओ के आरक्षण से संबधित कानूनी प्रावधान कर सकता है. इसी अनुच्छेद के खंड 6 के अनुसार पिछड़े वर्गों (बीसी) के व्यक्तियों के लिए भी नगर निकायों के प्रधान पदों पर आरक्षण प्रदान किया जा सकता है. चूँकि उक्त अनुच्छेद में जनरल/सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण का उल्लेख ही नहीं है इसलिए ऐसा करना संवैधानिक नहीं है।

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