कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पहली लहर के मुकाबले काफी संख्या में लोगों को अपना शिकार बनाया और काफी लोगों की जान भी ये वायरस अब तक ले चुका है। हर दिन इस वायरस से काफी लोग संक्रमित हो रहे हैं, ऐसे में इस वायरस की चेन को तोड़ने के लिए अब भी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। यही नहीं, अगर हमें इस वायरस से बचकर रहना है तो हमें बिना किसी काम के फालतू घर से बाहर नहीं जाना चाहिए। हालांकि, एक अच्छी खबर ये जरूर है कि हर दिन इस वायरस को मात देकर काफी संख्या में लोग अपने-अपने घर भी लौट रहे हैं। लेकिन जो लोग कोरोना संक्रमित होने के बाद ठीक हो रहे हैं, उनमें कई तरह के साइड इफेक्ट्स भी देखे जा रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा मामले वो हैं, जिनमें मरीजों को ठीक होने के बाद गंध और स्वाद आने में समय लग रहा है।
कम खाना न खाएं- कोरोना से संक्रमित हुए मरीजों को ठीक होने के बाद भी स्वाद और गंध नहीं आ रही है। साथ ही स्वाद न आने की वजह से भी उनकी खाने की इच्छा भी नहीं होती है। ऐसे में कम खाने के कारण मरीज का वजन घटने लगता है। इसलिए कोरोना से ठीक होने के बाद भी आपको एक अच्छी डाइट लेनी है।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी- कोरोना से संक्रमित होने की वजह से मरीज को स्वाद और गंध नहीं आ पाते हैं। लेकिन जब किसी चीज की गंध महसूस नहीं होती है, तो इसे एनोस्मिया कहते हैं। लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि अगर आपको गंध महसूस न होने वाली दिक्कत पांच-छह महीने तक रहती है, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ये उपाय आ सकते हैं काम-जिन लोगों को गंध नहीं आ रही है उन्हें गंध प्रशिक्षण करना चाहिए।
-ऐसे लोगों को वो चीजें सूंघनी चाहिए, जिनमें गंध काफी तेज आती है। इससे सहायक संवेदी सहायक कोशिकाएं उत्तेजित होकर सक्रिय हो सकती हैं।
-कपूर, हींग, सरसों का तेल, परफ्यूम (इत्र) आदि को 15-20 मिनट तक सूंघें। ऐसा आप रोजाना दिन में दो-तीन बार कर सकते हैं।
-आप स्वाद के लिए अदरक या फिर कच्चा लहसुन भी चबा सकते हैं।
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं।
यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।

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