आईबी के हार्ड-कोर अधिकारी की तैनाती पर हैं दिशा-निर्देश- हेमंत

शनिवार, 26 जून 2021
चंडीगढ़ (सिटी मीडिया) हाल ही में हरियाणा के डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) मनोज यादव द्वारा गृह सचिव को पत्र भेज उन्हें उनके पद से रिलीव (पदमुक्त) करने की इच्छा जताई गयी ताकि वह (यादव) केंद्रीय गृह मंत्रालय के संगठन आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) में वापिस लौटकर वहां एडीशनल डायरेक्टर (अतिरिक्त निदेशक) के तौर पर अपनी ड्यूटी संभाल सकें. न्होंने कैरियर और पारिवारिक कारणों को इसकी वजह लिखा है. पत्र में यह भी उल्लेख है कि वह आईबी से हरियाणा सरकार में दो वर्षो के लिए बतौर डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति ) आये थे. बहरहाल, यह विषय गृह मंत्री अनिल विज तक पहुंच गया है हालॉकि मुख्यमंत्री ही इस पर फाइनल निर्णय लेंगे. इसी बीच प्रदेश के नए डीजीपी की चचार्ओं का दौर शुरू हो गया है।इस सबसे बीच कई हलकों में एक प्रश्न यह भी उठ रहा है कि जब मनोज यादव मूल रूप से हरियाणा कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी है, तो वह आईबी से हरियाणा में डेपुटेशन पर क्यों आये जबकि प्रदेश कैडर का आईपीएस अधिकारी केंद्र सरकार अर्थात उसकी उसकी विभिन्न एजेंसियों/संगठनो में बतौर डेपुटेशन पर जाता है.

इस विषय पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि यादव, जिनका गृह राज्य उत्तर प्रदेश है एवं जो अगस्त, 1989 में आईपीएस में सीधे नियुक्त हुए हालांकि उन्हें 1989 के स्थान पर 1988 का बैच वर्ष प्रदान किया गया था एवं हरियाणा कैडर अलॉट हुआ जहाँ 14 वर्षों की सेवा के बाद फरवरी, 2003 में यादव आईबी में बतौर डेपुटेशन पर गए थे जहाँ उन्हें समय समय पर केंद्र सरकार द्वारा एक्सटेंशन प्रदान होती रही एवं इसी दौरान वो असिस्टेंट/डिप्टी/जॉइंट और फिर एडिशनल डायरेक्टर पद पर आसीन रहे.


फरवरी, 2019 में अर्थात 16 वर्षों तक निरन्तर आईबी में रहने के बाद उन्हें दो वर्षों के लिए अर्थात फरवरी, 2021 तक हरियाणा का डीजीपी तैनात किया था, जिसके बाद इस वर्ष पहले जनवरी में हरियाणा सरकार द्वारा फिर मार्च में केंद्र सरकार द्वारा आगामी आदेशों तक एक्सटेंशन प्रदान की गयी.
अब चूँकि यादव द्वारा आईबी से हरियाणा सरकार में डेपुटेशन पर आने और अब आईबी में वापिस जाने का अपने पत्र में उल्लेख किया है, इस पर हेमंत ने बताया कि इससे तो यही लगता है कि यादव आईबी में हार्ड- कोर अधिकारी के तौर पर शामिल हैं जिसके लिए चयन एक केंद्रीय कमेटी करती है जिसका अनुमोदन केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) द्वारा होता है. एक बार आईबी में हार्ड-कोर अधिकारी बनने के बाद आईपीएस अधिकारी को सामान्यत: उसके प्रदेश कैडर में नहीं भेजा जाता है हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों या आवश्यक प्रशासनिक कारणों से उपरोक्त कमेटी और एसीसी की सहमति द्वारा ऐसा किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त आईपीएस कार्यकाल पालिसी अनुसार आईबी के हार्ड-कोर अधिकारियों को समय समय पर विभिन्न प्रदेशों में (हालांकि सम्बंधित आईपीएस के गृह प्रदेश को छोड़कर) डेपुटेशन पर इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी (सुरक्षा) संबंधी पदो पर अधिकतम तीन वर्षों के लिए भेजा जा सकता है. हालांकि चूँकि प्रदेश डीजीपी के पद को तकनीकी तौर पर पूर्णतया इंटेलिजेंस एवं सुरक्षा संबंधी नहीं कहा जा सकता, तो क्या केंद्र सरकार द्वारा यादव के मामले में कोई ढील दी गई थी, हेमतं ने 4 मार्च को केंद्रीय कैबिनेट सचिवालय में एक आरटीआई दायर कर इसकी सूचना मांगी थी। इसके अतिरिक्त आईपीएस पालिसी अनुसार डीजी स्तर के अधिकारी को राज्यों में डेपुटेशन पर है भेजा जाएगा. हेमंत ने बताया कि यादव को फरवरी, 2021 में ही केंद्रीय सरकार में केंद्र में डीजी रैंक में इंपैनल्ड कर दिया है, तो क्या इसके दृष्टिगत उन्हें 2 मार्च को हरियाणा कैडर में डेपुटेशन में एक्सटेंशन देने हेतु उक्त नीति में ढील दी गयी थी

इस संबंध में भी उन्होंने आरटीआई में सूचना मांगी थी।

13 मार्च को कैबिनेट सचिवालय के सीपीआईओ (केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ) ने एक पंक्ति में मात्र यही जवाब दिया कि उनके पास मनोज यादव के हरियाणा डीजीपी बनने सम्बन्धी दी गयी स्वीकृति और एक्सटेंशन सम्बन्धी कोई जानकारी नहीं है. इस जवाब से असंतुष्ट हेमंत ने 18 मार्च को सचिवालय में प्रथम अपील दायर की परन्तु तीन माह बाद भी उसका निपटारा लंबित है. इसी 24 जून को उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में एक ताजा आरटीआई दायर की जिसे 25 जून गृह मंत्रालय को ट्रांसफर कर दिया गया है।

HEMANT KUMAR

M.A.(Pub Admn) LL.BADVOCATE, PUNJAB & HARYANA HIGH COURT, CHANDIGARH# 414, SECTOR-7, URBAN ESTATE, AMBALA CITY, HARYANA
Cell Number : +91 9416 88 77 88Twitter Handle : @hemantkumar24x7

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here