15 फरवरी 2019 से लागू कानून, 24 जुलाई 2019 को नोटिफाई हुए नियम

चंडीगढ़ (सिटी मीडिया) 30 जून 2021
हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में अनुसूचित जाति (एस.सी)  उम्मीदवारों को आउटसोर्सिंग पालिसी में 20 % आरक्षण देने की घोषणा की गयी. इसके अलावा एस.सी /एस.टी कानून, 1989 के नियमो अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय विजिलेंस और मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक भी हर छ: माह में करवाने का आदेश  एवं  प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगो को  उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए उपयुक्त कदम उठाने का भी निर्देश दिया गया।

ज्ञात रहे कि सितम्बर, 2018 में  खट्टर  सरकार द्वारा राज्य  विधानसभा से हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति (एस.सी)  आयोग विधेयक, 2018 पारित करवाया गया जिसे राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य द्वारा 5 नवंबर 2018 को स्वीकृति प्रदान की गयी जबकि 30 नवंबर 2018 को इसे हरियाणा सरकार के गजट (राजपत्र ) में प्रकाशित कर भी अधिसूचित किया गया।


पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि उक्त  हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग कानून, 2018 की धारा 1 (2 ) में उल्लेखित है कि यह कानून हालांकि उस तिथि से लागू होगा जो  राज्य सरकार सरकारी गजट में नोटिफिकेशन जारी कर  निर्धारित करेगी. इस सम्बन्ध में  15 फरवरी 2019 को हरियाणा सरकार के अनुसूचित जातियां एवं पिछड़े वर्ग कल्याण विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव, धनपत सिंह (वर्तमान में हरियाणा के राज्य निर्वाचन आयुक्त) द्वारा एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर उसी  तिथि से यह कानून  लागू कर दिया गया परन्तु यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि  आज तक  इस आयोग का गठन  नहीं किया गया है।

यही नहीं 24 जुलाई 2019 को अनुसूचित जातियां एवं पिछड़े वर्ग कल्याण विभाग की तत्कालीन प्रधान सचिव नीरजा शेखर, आईएएस द्वारा उक्त 2018 अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग नियम, 2019 भी गजट में नोटिफाई किये गए जो उसी दिन से लागू भी हो गए।


जहाँ तक  उपाध्यक्ष का विषय है, वह आयोग के सदस्यों में से ही पदांकित किया जाएगा. आयोग में अध्यक्ष के अलावा अधिकतम चार सदस्य होंगे जो  अनुसूचित जाति से सम्बंधित होंगे जिनमे से एक महिला होगी. इसके अलावा आयोग में एक सदस्य सचिव हो, जो सरकार का अधिकारी हो या रहा हो, जो स्पेशल सेक्रेटरी (विशेष सचिव ) से नीचे के रैंक न हो. आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष या उनकी 65 वर्ष तक की आयु तक होगा।

जहाँ तक आयोग के कार्यो एवं शक्तियों का प्रश्न है, तो प्रदेश के अनुसूचित जातियों  के कल्याण और  संरक्षण के लिए भारत के संविधान एवं अन्य कानूनों में उन्हें  दिए गए अधिकारों को सुनिश्चित करना, इन जातियों के हितो के रक्षा करना, इनके द्वारा  दायर की गयी शिकायतों की उचित जांच करना, इन जातियों के लोगों के सामजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया एवं  प्रगति के  सम्बन्ध में कार्यो का निर्वहन करना आदि शामिल हैं. आयोग के पास सिविल कोर्ट जैसे शक्ति भी होंगी।


ज्ञात रहे कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का प्रावधान है जिसके वर्तमान अध्यक्ष विजय सांपला  हैं जिन्हे मोदी सरकार ने इसी वर्ष  फरवरी में  नियुक्त किया. वर्ष 2004 में केंद्र की तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने संविधान  संशोधन कर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के लिए अनुच्छेद 338 ए डाला  जबकि वर्ष  2018 में वर्तमान  मोदी सरकार ने संविधान संशोधन  कर  राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के लिए अनुच्छेद 338 बी डाल दिया था।


हेमंत ने  बताया कि हरियाणा में तत्कालीन हुड्डा  सरकार द्वारा 10 अक्टूबर 2013 को  एक सरकारी  नोटिफिकेशन से   अनुसूचित जाति आयोग गठित किया गया था और  इसके चेयरमैन  के तौर पर  हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रदेशायक्ष फूल चंद मुलाना एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति इसके दस महीने बाद अगस्त, 2014 में की गयी थी जब तत्कालीन  राज्य  विधानसभा के आम चुनाव केवल दो माह दूर थे जिस कारण इसे राजनीतिक तौर पर देखा गया था ।

बहरहाल, जब अक्टूबर, 2014 विधानसभा चुनावो में प्रदेश में  भाजपा  सरकार बनी,  तो दिसंबर, 2014 में उक्त आयोग को भंग कर दिया गया जिसे मुलाना ने  हाई कोर्ट में याचिका डालकर चुनौती भी थी परन्तु  दिसंबर, 2016 में हाई कोर्ट ने इसे   खारिज कर दिया था।

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